कोचिंग वाले भी न गजब का खेल खेलते हैं
जब तक पैसा देते हैं तब तक केयर करते हैं||
ये युवक भोले-भाले फुसल जाते हैं,
इंक्वायरी कराते हैं स्वीट-स्वीट बोलकर,
किसी से एक बार में ले लेते हैं पैसा
तो किसी से किस्ते में करके उसूलते हैं ||
ये कोचिंग वाले भी न यारों गजब का खेल खेलते हैं
जब तक पैसा देते हो तब तक care करते हैं
कोई लड़का आता है अपने मन में सपने सजा कर
तो कोई अपने माता-पिता भाई -बहन के सपने को लेकर
और ये उनके सपनों से खेलना जानते हैं ||
ये कोचिंग वाले भी न गजब का खेल खेलते हैं
जब तक पैसा दे........
हाव भाव से तो ये कलेक्टर मेंकर लगते हैं
कभी class में बैठे-बठे इंटरव्यू का दर्शन तो कभी IPS भी बना देते है||
यह कोचिंग वाले भी ना यारों गजब का.........
क्लास और ऑफिस का ब्राइटनेस ऐसा है कि
हमें भी किसी डीएम के कुर्सी को महसूस करा देता हैं||
ये बच्चों की भावनाओं से खेलना जानते हैं,
ये कोचिंग वाले भी न यारों गजब का खेल खेलते हैं
जब तक पैसा देते हैं तब तक केयर करते हैं......
©prakashsah



Bahut hi sunder��ब्यंग है
ReplyDeleteNice poem
ReplyDeletevery nice
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