तुम मौसम मौसम लगते हो
जो पल पल रंग बदलते हो
तुम सावन सावन लगाते हों
फिर भी सदियों बाद बरसते हो
तुम सपने सपने लगाते हो
अक्सर ख्वाबों में दिख जाते हो
तुम पल पल मुझसे लड़ते हो
पर फिर भी अच्छे लगते हो
बात तो है शर्मीली सी
पर कहने से दिल डरता है
लो आज तुम्हें ये कहते है
तुम अपने अपने लगते हो 2
©Praksshsah


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